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बेगूसराय चकिया गैंगरेप मामला: SIT की कार्रवाई तेज, दो और आरोपी गिरफ्तार; फरार आरोपी पर पुलिस ने बढ़ाया दबाव

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बेगूसराय के चर्चित चकिया मामले में SIT ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक चार आरोपी पकड़े जा चुके हैं, जबकि फरार आरोपी के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर इश्तेहार और मुनादी की कार्रवाई की गई है।

बेगूसराय/आलम की खबर:बेगूसराय जिले के चकिया थाना क्षेत्र में सामने आए चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित SIT ने जांच के दौरान दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक चार आरोपियों को पुलिस पकड़ चुकी है, जबकि एक अन्य फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

पुलिस ने फरार चल रहे नामजद आरोपी के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए उसके घर पर इश्तेहार चस्पा किया है। इसके साथ ही गांव में सार्वजनिक मुनादी कराकर आरोपी को पुलिस के सामने उपस्थित होने का संदेश दिया गया है। पुलिस का कहना है कि यदि आरोपी जल्द आत्मसमर्पण नहीं करता है तो आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस पूरे मामले की जांच अब SIT और जिला पुलिस की संयुक्त टीम कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए शुरुआत से ही वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

मामले को लेकर बेगूसराय पुलिस अधीक्षक मनीष ने बताया कि चकिया थाना क्षेत्र में दर्ज प्राथमिकी में कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें कुछ नामजद आरोपी हैं, जबकि कुछ लोगों की पहचान जांच के आधार पर की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

SIT की जांच में अब तक कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें एक आरोपी को फरीदाबाद से और दूसरे को बेगूसराय के दियारा इलाके से पकड़ा गया था। इसके बाद तकनीकी जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर SIT तथा DIU की संयुक्त टीम ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सिमरिया घाट निवासी रामू महतो उर्फ रामबाबू सहनी और शाम्हो थाना क्षेत्र के झगड़ाहा जगनसैदपुर निवासी सोली बिन्द उर्फ सोलिया उर्फ सोनू शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों से पूछताछ की गई है और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के गंभीर मामलों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि मजबूत साक्ष्य जुटाना भी जरूरी होता है, ताकि अदालत में मामले को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जा सके। इसी उद्देश्य से SIT लगातार घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

वहीं, मामले के मुख्य नामजद आरोपी सूरज महतो की गिरफ्तारी अभी नहीं हो सकी है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। गिरफ्तारी नहीं होने के बाद न्यायालय की अनुमति से पुलिस ने आरोपी के घर पर इश्तेहार चस्पा किया और सार्वजनिक रूप से मुनादी कराई।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि फरार आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। अगर आरोपी तय समय के अंदर पुलिस के सामने उपस्थित नहीं होता है तो आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।

बेगूसराय के इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विपक्षी नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सरकार से त्वरित न्याय और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे। इसके बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। राजनीतिक दलों की सक्रियता के बाद यह मामला राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल SIT की कार्रवाई जारी है और पुलिस की नजर फरार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर बनी हुई है। चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस आगे की जांच में जुटी है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

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बेगूसराय चकिया मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि गंभीर अपराधों में तेज और निष्पक्ष जांच कितनी जरूरी है। ऐसे मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि जांच एजेंसियों को मजबूत साक्ष्य जुटाकर अदालत में प्रभावी तरीके से मामले को रखना होता है।

पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह बिना किसी दबाव के सभी पहलुओं की जांच करे और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करे। वहीं समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़ित परिवार की गरिमा और सुरक्षा का ध्यान रखा जाए।

अब आगे की जांच और फरार आरोपी की गिरफ्तारी पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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